डायलाग कार्यक्रम की एक झलक
फ़ेसबुक पर मिले दोस्त कुछ ब्लोगजगत के तो कुछ नये मगर लगा ही
नही पहली बार मिले हों ………एक मित्रवत माहौल यूँ लगा अपने ही घर
मे आये हों ..........सुशीला पुरी जी, अमितेश जैन , अवनीश सिंह
, जितेन्द्रकुमार पाण्डेय जी, आनन्द द्विवेदी जी, त्रिपुरारि कुमार शर्मा ,
राजीव तनेजा जी, कितने तो ब्लोगजगत के दोस्त मिल गये उनके
अलावा फ़ेसबुक के दोस्तों से रु-ब-रु होने का मौका मिला जिसने माहौल
को खूबसूरत बना दिया
दोस्ताना माहौल मे
मिथिलेश जी ओम थानवी जी के साथ
नवोदित कवि काव्य पाठ करते हुये
मस्तमौला ने मस्ती ला दी सारे प्रांगण मे बहार ला दी
ओम थानवी जी अपनी पुस्तक मोहनजोदडो के अंश पढते हुये
नंद भारद्वाज जी काव्य पाठ करते हुये
मिले कुछ नये पुराने दोस्त
हम भी हैं शामिल इस आलम मे
प्रसिद्ध कवि नंद भारद्वाज जी, मिथिलेश जी ,अंजू शर्मा जी
प्रसिद्ध कवि नंद भारद्वाज जी, मिथिलेश जी ,अंजू शर्मा जी
नंद जी तल्लीनता से नवोदित कवियों पर राय लिखते हुये
नवोदित कवि काव्य पाठ करते हुये
राजीव तनेजा जी अपने अन्दाज़ मे
ओम थानवी जी के साथ बाकी सभी
नवोदित कवि काव्य पाठ करते हुये
ओम थानवी जी नंद भारद्वाज जी के साथ
नवोदित कवियों ने दिखाया दम खम
बात उनमे भी कुछ नही है कम
सबका है अन्दाज़ जुदा
ये प्रेरणा ने बतलाया
ध्यानपूर्वक सुनते हुये
अनौपचारिक वातावरण और युवाओं का जोश बुलन्दी पर
हाय रे !कूकर विदेशी क्यों ना भया
प्रभु तुमने ये क्या किया
ये है त्रिपुरारि कुमार शर्मा जिसे सब जानते हैं
दोस्तों के साथ
इतनी बडी हस्ती के साथ मुझ अदना को मिलना परम सौभाग्य
ये हैं वो नंद भारद्वाज जिनके साथ मेरी कवितायें भी "स्त्री होकर सवाल करती है" पुस्तक मे छपीं ………इससे बढकर और क्या होगा …… और सबसे बडी बात उन्होने मुझे ऐसे पहचाना जैसे कब से जानते हों एकदम बोले ……आप वन्दना गुप्ता हो ना ………उफ़ ! मै तो कभी सपने मे भी नही सोच सकती थी कि इतनी बडी हस्ती मुझे पहचान लेगी ………ह्रदय भाव विह्वल हो गया …………बस इन्हीं लफ़्ज़ों के साथ कल वहाँ जाना सार्थक हो गया ……इसीलिये कहती हूँ जो मेरे साथ हुआ………डायलाग तो डायलाग ही था……कमाल तो होना ही था

































































