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सोमवार, 18 अप्रैल 2011

.क्या होगा इसका जवाब सरकार के पास ?

ना जाने कब से एक प्रश्न कुलबुला रहा है कि आज जब भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक लडाई लड़ी गयी तब उसका कुछ हल निकालने की दिशा में कदम उठाने शुरू हुए मगर किसी ने ये नहीं सोचा अब तक कि इतना भ्रष्टाचार फैला कैसे और किसके कार्यकाल में और क्यों? देखा जाये तो भ्रष्टाचार का हमेशा बोलबाला रहा फिर भी पिछले कुछ सालों में भ्रष्टाचार ने अपनी जडें इतनी फैला लीं कि कोई टहनी , कोई शाखा भ्रष्टाचार से मुक्त दिखाई नहीं देती ............जहाँ भी नज़र दौड़ाओ सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार की व्यापकता नज़र आती है .........कोई ना कोई घोटाला तैयार है हर दिन ............अब तो लगता है हम गिनती भी भूलने लगेंगे कि कौन से कौन से कामों में भ्रष्टाचार फैला और कौन कौन उसमे शामिल था .............कौन सा ऐसा कार्य रहा जहाँ भ्रष्टाचार का बोलबाला ना रहा हो और वो भी पिछले दस सालों में तो भ्रष्टाचार सीमा से बाहर होता जा रहा है ...........अब तो भारत देश को भ्रष्टाचार का देश कहा जाने लगा है तो ऐसे में ये प्रश्न उठना वाजिब है कि आखिर इसके लिए दोषी कौन है और किसके कार्यकाल में भ्रष्टाचार सबसे ज्यादा फैला ?

क्या नैतिकता की दृष्टि से सरकार को अपना पड़ नहीं छोड़ देना चाहिए ?

सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार एक ही सरकार के कार्यकाल में हुआ है सभी जानते हैं तो ये प्रश्न क्यूँ नहीं उठाया जाता ?

आखिर इसके लिए आन्दोलन क्यों नहीं किया जाता?

शायद इसलिए क्योंकि हमाम में सभी नंगे हैं लेकिन जनता को तो अपनी शक्ति और एकता का परिचय देना चाहिए और एक आह्वान ऐसा भी करना चाहिए .............क्यों नहीं जनता सरकार से जवाब  मांगे कि उनके ही कार्यकाल में भ्रष्टाचार आसमान को कैसे छूने  लगा ?

क्या सरकार की कोई जवाबदेही नहीं है?

सरकार तो एक मिनट में किसी से भी कुछ भी पूछने को तैयार रहती है यहाँ तक कि अन्ना के अनशन को किसने प्रायोजित किया , कितने पैसे लगे ऐसे सवाल एक पल में सरकार ने उठा दिए मगर क्या जनता फिर उनसे ये सवाल नहीं कर सकती कि आपके कार्यकाल में इतना भ्रष्टाचार कैसे हुआ और अब उन्हें नैतिकता के आधार पर अपने सभी मंत्रिमंडल के साथ त्यागपत्र दे देना चाहिए ?

ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिनके जवाब जनता जरूर जानना चाहेगी ..........क्या होगा इसका जवाब सरकार के पास ?

26 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सरकार किसी भी पार्टी कि हो किसी के पास जवाब नहीं होगा ...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

संगीता जी ने सही फरमाया है।
बहुत से प्रश्नों को उत्तर नहीं मिलते हैं।
उनमें से यह भी एक है।

एम सिंह ने कहा…

आपसे पूरी तरह सहमत हूं।
सब चोर हैं।
चोरों की सत्ता है।
शरीफ को जीने कहां देंगे।
शानदार, बधाई.
मेरे ब्लॉग पर -
मीडिया की दशा और दिशा पर आंसू बहाएं
भले को भला कहना भी पाप

pinky ने कहा…

भ्रष्टाचार सिर्फ 1सूरत में ही कम हो सकता हैं कि हर इंसान अपने अधिकारों के प्रति जाग्रत हो और जहा भी गलत बात या चीज़े हो उनका विरोध करे ..दूसरो के लिए ना सही पर 'खुद' के लिए तो लड़े और जीते ही... हर व्यक्ति ऐसा करने लग जाय तो स्थिति में परिवर्तन तो 'होगा' ही...

Shah Nawaz ने कहा…

भ्रष्टाचारी कहीं और से नहीं बल्कि हमारे समाज में से ही आते हैं.... मेरे विचार से भ्रष्टाचार को समाप्त करने के दो ही तरीकें हैं.... या तो सारा समाज ही सुधर जाए या फिर कानून ज़बरदस्ती सुधर जाने पर विवश कर दें.... केवल सरकारों को बदल देने से कुछ नहीं होगा... नई सरकार भी ऐसी ही होगी.... और फिर सरकारी और प्राइवेट कंपनियों पर नीचे या ऊपर के पदों पर बैठे भ्रष्टाचारी तो किसी सरकार का भी हिस्सा नहीं है....

शिखा कौशिक ने कहा…

shah nawaz ji se poori tarah sahmat hun .ham khud bhi poori tarah sachche nahi tab sarkar ko kya kah sakte hai ?.

संजय भास्कर ने कहा…

आपसे पूरी तरह सहमत हूं।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

इतिहास कुरेदने से क्या लाभ, भविष्य संवार लें हम आज से।

संध्या शर्मा ने कहा…

वंदना जी ये कुछ ऐसे प्रश्न हैं चाहे सरकार किसी भी पार्टी कि हो किसी सरकार के पास जवाब नहीं होगा हाँ भले ही ऐसा होगा की सरकार बदलते ही ये सभी जनता के सुर में सुर अवश्य मिला देंगे और सवाल रह जायेगा वहीँ का वहीँ ....

kshama ने कहा…

Pichhale kayee salon se kayee sarkaron ne pad tyaag dena chahiye tha! Par itnee sharm kiske paas hai?Pichhale 31 saalon se uchchtam nyayalay kaa avmaan ho raha hai! Janta ko to in baton kee khabar tak nahee!

इमरान अंसारी ने कहा…

वंदना जी,

सार्थक प्रश्न उठाया है आपने... ...पर क्या हम खुद ही भ्रष्टाचार को बढावा नहीं देते?

shikha varshney ने कहा…

न उनके पास जबाब है , और न वे जबाब देने की जरुरत ही महसूस करते हैं.

राज भाटिय़ा ने कहा…

सरकर को पता हे जो जनता कुछ रुपयो के बदले अपनी किमती वोट हम दे सकती हे एक रंगीन टी वी के लिये पांच साल तक हमारी गुलाम बन सकती हे वो क्या सवाल करेगी, इस लिये लुटॊ ओर खुब लूटॊ, सवाल करने के लिये अंदोलन करने के लिये जनता को साफ़ सुधरा होना चाहिये क्या हम साफ़ सुधरे हे?

सदा ने कहा…

बिल्‍कुल सही कहा है आपने ...विचारणीय प्रस्‍तुति ।

Rakesh Kumar ने कहा…

कहा तो यही जायेगा कि जनता ने सरकार को चुना.लेकिन उसमें आप जैसे बुद्धिमान जागरूक लोग कितने होतें हैं.यदि होते भी हैं तो अलग अलग धडों में बटें होते हैं.सब वोट बैंक की राजनीति पर ही तो चलता है.जनता यदि खुद ईमानदार,एकजुट और समझदार हो तो भ्रष्टाचार तो गधे की सिंग की तरह गायब हो जायेगा.

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" ने कहा…

देश और समाजहित में देशवासियों/पाठकों/ब्लागरों के नाम संदेश:-
मुझे समझ नहीं आता आखिर क्यों यहाँ ब्लॉग पर एक दूसरे के धर्म को नीचा दिखाना चाहते हैं? पता नहीं कहाँ से इतना वक्त निकाल लेते हैं ऐसे व्यक्ति. एक भी इंसान यह कहीं पर भी या किसी भी धर्म में यह लिखा हुआ दिखा दें कि-हमें आपस में बैर करना चाहिए. फिर क्यों यह धर्मों की लड़ाई में वक्त ख़राब करते हैं. हम में और स्वार्थी राजनीतिकों में क्या फर्क रह जायेगा. धर्मों की लड़ाई लड़ने वालों से सिर्फ एक बात पूछना चाहता हूँ. क्या उन्होंने जितना वक्त यहाँ लड़ाई में खर्च किया है उसका आधा वक्त किसी की निस्वार्थ भावना से मदद करने में खर्च किया है. जैसे-किसी का शिकायती पत्र लिखना, पहचान पत्र का फॉर्म भरना, अंग्रेजी के पत्र का अनुवाद करना आदि . अगर आप में कोई यह कहता है कि-हमारे पास कभी कोई आया ही नहीं. तब आपने आज तक कुछ किया नहीं होगा. इसलिए कोई आता ही नहीं. मेरे पास तो लोगों की लाईन लगी रहती हैं. अगर कोई निस्वार्थ सेवा करना चाहता हैं. तब आप अपना नाम, पता और फ़ोन नं. मुझे ईमेल कर दें और सेवा करने में कौन-सा समय और कितना समय दे सकते हैं लिखकर भेज दें. मैं आपके पास ही के क्षेत्र के लोग मदद प्राप्त करने के लिए भेज देता हूँ. दोस्तों, यह भारत देश हमारा है और साबित कर दो कि-हमने भारत देश की ऐसी धरती पर जन्म लिया है. जहाँ "इंसानियत" से बढ़कर कोई "धर्म" नहीं है और देश की सेवा से बढ़कर कोई बड़ा धर्म नहीं हैं. क्या हम ब्लोगिंग करने के बहाने द्वेष भावना को नहीं बढ़ा रहे हैं? क्यों नहीं आप सभी व्यक्ति अपने किसी ब्लॉगर मित्र की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हैं और किसी को आपकी कोई जरूरत (किसी मोड़ पर) तो नहीं है? कहाँ गुम या खोती जा रही हैं हमारी नैतिकता?

मेरे बारे में एक वेबसाइट को अपनी जन्मतिथि, समय और स्थान भेजने के बाद यह कहना है कि- आप अपने पिछले जन्म में एक थिएटर कलाकार थे. आप कला के लिए जुनून अपने विचारों में स्वतंत्र है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. यह पता नहीं कितना सच है, मगर अंजाने में हुई किसी प्रकार की गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. अब देखते हैं मुझे मेरी गलती का कितने व्यक्ति अहसास करते हैं और मुझे "क्षमादान" देते हैं.
आपका अपना नाचीज़ दोस्त रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

सदियों से भ्रष्टाचार समाज देश का अंग रहा है.. मानव मात्र की मूल कमजोरी है.. यह रहेगा किसी ना किसी रूप में...

Sawai Singh Rajpurohit ने कहा…

भगवान हनुमान जयंती पर आपको हार्दिक शुभकामनाएँ.

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

जहाँ तक सरकारों का सवाल है तुम सांपनाथ तो हम नागनाथ से अलग कुछ नहीं है । हम देखते नहीं हैं जब भी सांसदों के वेतन और भत्ते बढने की बात आती है तो सभी दल के नेता पक्ष-विपक्ष भूलकर कितनी एकजुटता से उस बिल को अपना समर्थन प्रदान करते दिखाई देते हैं । यही स्थिति सरकारों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के प्रति चलते-चलते ही आज देश और देशवासी इतनी दयनीय स्थिति में आ खडे हुए हैं ।

जाट देवता ने कहा…

जाट देवता की राम राम,
बहुत लोगों ने बहुत लिख दिया।
लेकिन जो ये पैसा खाने वाले व ढिंढोरा पीटने वाले पत्रकार है,
अगर ये ही सुधर जाये तो बात का बतंगड बनाने में इन्हे कितनी देर लगती है।
हमारा देश व इसके वासी छोटी सी बात का बतंगड बन जाने पर ही नींद से जागते है।

Udan Tashtari ने कहा…

जो भी जितना भी बेहतर हो सके.

Ashutosh Pandey ने कहा…

हम सब चोर हैं.....
असल में सरकारों को तो सब कोसते हैं, लेकिन हम ये भूल जातें हैं की ये हमारे द्वारा तैयार व्यवस्था का एक अंग हैं किसी आफिस में आकर देखिये घूस लेने वालों से देने वालों की लम्बी कतारें हैं. हर आदमी चाहता है की उसका काम पहले हो, वो रोड पर गलत चले उसका चालन न हो, बिजली की चोरी करे उसे कोई पकडे नहीं, वोट के बदले नोट ले लेकिन उसका कुछ बिगड़े नहीं, नौकरी खरीदने के साथ, मेनेजमेंट कोटे से इंजीनियरिंग और मेडिकल की सीटें खरीदने वाले अनगिनत हैं. जिन गाँव को भोला भला कहा जाता है, वहा कुवारी लड़कियां विधवा पेंशन ले रहीं हैं, इन गाँव में बिना शराब के वोटर पोलिंग बूथ नहीं आता है. एक बार इन्हें ठीक करवा दीजिये, सब ठीक हो जाएगा, अन्यथा लोकपाल या सूचना का अधिकार कुछ नहीं हो सकता है, और हम और आप अपना नाम कमा रहें हैं सरकार को कोस कर, हमें Comments चाहिए बस, जितना समय हम फेसबुक पर बिताते हैं उसका १/४ भी देश को दें तो कायाकल्प हो जाएगा, ये सच है मैंने खुद करके देखा है, आप जानती हैं, जब मैंने जंतर मंतर पर जाकर फोटो खिचवा कर फेसबुक पर अपलोड करने वालों की खिचाई की तो मुझे ब्लाक कर दिया. क्योंकि मेरे पोस्ट उनके वाल पर उनकी पोल खोल रहे थे, लोगं कितने लोग है जो फेसबुक भ्रष्टाचार के लिए सरकारों को कोसते हैं, और उन्होंने कभी कोई भ्रष्टाचार ना किया हो, करवाया हो, भ्रष्टाचार की लड़ाई में खड़े अन्ना अब ये कह रहें की अगर ये बिल संसद में पास नहीं होता है कोई बात नहीं, वे संसद की मर्यादा की रक्षा करेंगे और इसे स्वीकार करेंगे, वही अन्ना कल मोदी को सर्वश्रेष्ट का खिताब देतें हैं, तो किरकिरी होने के बाद स्वामी अग्निवेश से कहलावातें हैं की अन्ना को तथ्यों की जानकारी नहीं थी, और देखिएगा इस देश में परिवारवाद का हल्ला आम है...... लेकिन जब श्री शशि भूषन और उनके बेटे को एक साथ लोकपाल कमेटी में लिया गया तो किसी को कोई परेशानी नहीं हुई, सरकार तो चोर है...... जी हम आपकी बात मन लेते हैं ज़रा ध्यान दीजिये........ जंतर मंतर के नेताओं पर प्रशांत भूषन जी जो विगत पांच सालों से अमर सिंह के खिलाफ एक केस में वकील हैं वो साफ़ कहते हैं की वो अमर सिंह को नहीं जानते हैं, वैसे भी इतने प्रख्यात वकील होकर अगर उन्होंने अभी तक ये जानने की कोशिश नहीं की जिस शख्स के खिलाफ वो वकालत कर रहें, तो वो लोकपाल के बारे में क्या खाक जानेंगे? कहने का लब्बोलुआब ये है की सरकार के लोग ही नहीं सब भ्रष्टाचारी हैं, मैंने तो अपने ब्लॉग पर अन्ना को लिखा था अनशन नहीं.. लाठी उठाइए और इस देश की आत्मा को परिष्कृत कीजिये. अब बताइयेगा क्या योगदान दे रहें हैं हम? दोस्तों यही सवाल आप सब से?

हल्ला बोल ने कहा…

भारतीय संस्कृति की रक्षा करने वाले सभी हिन्दू धर्मावलम्बियों का सामुदायिक मंच बनाते हुए हमें अत्यंत प्रशन्नता का अनुभव हो रहा है. इस ब्लाग का मकसद पूरे विश्व में होने वाले हिन्दुओ पर अत्याचार की खबरे प्रकाशित करना है. इस ब्लॉग का मालिक कोई नहीं नहीं होगा. इस मंच से जुड़ने वाले सभी लोग बराबर जिम्मेदारी निभाएंगे. जो भी ब्लागर सच्चे हिन्दू हैं वे चाहे विश्व के किसी कोने में रहते हैं इस मंच के लेखक बन सकते हैं. मानवता का विनाश करने इस्लाम के अनुयायियों को तमाचा मारने के लिए मुस्लिमों के कुकृत्य की ख़बरें चाहे वे विश्व के किसी कोने में हो रही हो इस ब्लॉग पर प्रकाशित करें. साथ ही इसका मकसद हिन्दुओ को एकजुट करना भी है, आप जहाँ भी रहते हो, वहा अख़बार पढ़े और मुसलमानों द्वारा किये जा रहे कुकृत्य इस ब्लॉग पर प्रकाशित करें, साथ ही यह भी ध्यान दे बहुत सी ऐसी खबरे होती है जिन्हें समाचार पत्र प्रकाशित नहीं करते. लिहाजा आप लोंगो को ध्यान रखना होगा अपने आस-पास होने वाली घटनाओ पर, जहा पर भी मुस्लमान अधिक संख्या में रहते हैं. वहा उन्होंने हिन्दुओ का जीना दूभर कर दिए हैं. तो आप सभी हिन्दू भाइयों का कर्तव्य बनता है की सच्चाई सबके सामने लायें.
आईये सभी मिलकर इस्लाम का सच सामने लायें.....
जय श्री राम
इस हल्ला बोल शामिल होने के लिए अपनी ई-मेल भेंजे.........
hindukiawaz@mail.com

रचना दीक्षित ने कहा…

जान के अनजान बने रहना सरकार की फितरत में है.

गौरव शर्मा "भारतीय" ने कहा…

आश्चर्य इस बात का है की हिन्दुस्तान का ९५% आवाम भ्रष्टाचार की खिलाफ है मगर हिन्दुस्तान फिर भी विश्व के भ्रष्टतम देशों में गिना जाता है....
इसका कारण भ्रष्टाचार के खिलाफ क़ानून की अपर्याप्तता है या कुछ और मेरे विचार से इस पर भी इमानदारी पूर्वक विचार करने का वक़्त आ गया है...

हल्ला बोल ने कहा…

क्या आप सच्चे हिन्दू हैं .... ? क्या आपके अन्दर प्रभु श्री राम का चरित्र और भगवान श्री कृष्ण जैसा प्रेम है .... ? हिन्दू धर्म पर न्योछावर होने को दिल करता है..? सच लिखने की ताकत है...? महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवा जी, स्वामी विवेकानंद, शहीद भगत सिंह, मंगल पांडे, चंद्रशेखर आजाद जैसे भारत पुत्रों को हिन्दू धर्म की शान समझते हैं, भगवान शिव के तांडव को धारण करते हैं, भारतीय संस्कृति का सम्मान करने वाले हिन्दू हैं. तो फिर एक बार इस ब्लॉग पर अवश्य आयें. जय श्री राम
हल्ला बोल