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बुधवार, 20 अप्रैल 2011

बताओ ना कौन सी रिश्वत देते हो

ए ………सुनो
बहुत कहना चाह
रहा है आज ये दिल
मगर शब्द साथ
नही दे रहे
ना जाने कौन सी
खोह मे छुप गये
ज़रा देखना
तुम्हारे दिल के
पास तो नही
टहलने आ गये
ज़रा देखना
तुमसे तो
नही गुफ़्तगू
कर रहे
मेरे दिल की तो
कहीं नही कह रहे
ज़रा देखना
कोई नया
फ़साना तो नही
गढ रहे
ये शब्द बहुत
बेईमान हो गये है
आजकल
जब भी देखते हैं तुम्हे
मेरा दामन छोड
तुम्हारे पहलू मे
सिमट आते हैं
बताओ ना
कौन सी
रिश्वत देते हो

40 टिप्‍पणियां:

Sanjay Swaroop Srivastava ने कहा…

"ये शब्द बहुत
बेईमान हो गये है
आजकल
जब भी देखते हैं तुम्हे
मेरा दामन छोड
तुम्हारे पहलू मे
सिमट आते हैं"

-- सुन्दर कल्पना .... बधाई वंदना जी !!!

Sanjay Swaroop Srivastava ने कहा…

"ये शब्द बहुत
बेईमान हो गये है
आजकल
जब भी देखते हैं तुम्हे
मेरा दामन छोड
तुम्हारे पहलू मे
सिमट आते हैं"

-- सुन्दर कल्पना .... बधाई वंदना जी !!!

Sanjay Swaroop Srivastava ने कहा…

"ये शब्द बहुत
बेईमान हो गये है
आजकल
जब भी देखते हैं तुम्हे
मेरा दामन छोड
तुम्हारे पहलू मे
सिमट आते हैं"

-- सुन्दर कल्पना .... बधाई वंदना जी !!!

: केवल राम : ने कहा…

ये शब्द बहुत
बेईमान हो गये है
आजकल
जब भी देखते हैं तुम्हे
मेरा दामन छोड
तुम्हारे पहलू मे
सिमट आते हैं"

सही कहा है आपने ..भाव कुछ और होता है लेकिन शब्द कुछ और ....सुंदर भाव का सम्प्रेषण ....आपका आभार

संजय भास्कर ने कहा…

वन्दना जी,
बहुत अच्छी रचना है...एक संदेश दे रही है. बधाई स्वीकार करें।

संजय भास्कर ने कहा…

कितनी अच्छी और सच्ची बातें कितनी सहजता से कह जाती हैं आप !

योगेन्द्र पाल ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

आद.वंदना जी,
कविता में ढल कर शब्द जैसे प्राणवान हो गए हैं !
सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए आभार !

राजेश उत्‍साही ने कहा…

रिश्‍वत प्‍यार की।

यशवन्त माथुर ने कहा…

ज़रा देखना
तुमसे तो
नही गुफ़्तगू
कर रहे
मेरे दिल की तो
कहीं नही कह रहे

बहुत ही बढ़िया .

सादर

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

:):)...kahan se late ho aise shabd!

pyari si rachna...!

रचना दीक्षित ने कहा…

"ये शब्द बहुत
बेईमान हो गये है
आजकल
जब भी देखते हैं तुम्हे
मेरा दामन छोड
तुम्हारे पहलू मे
सिमट आते हैं"

वाह! वाह! क्या भाव हैं. सुंदर, अति सुंदर.

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

बहुत ही सुंदरता से संजोयी गयी रचना...

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर भावपूर्ण रचना। बधाई।

mridula pradhan ने कहा…

shabdon par yah upalambh...bahut meetha hai.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

यह रिश्वत मिलती तो आपको है पर असर शब्दों पर हो जाता है >>>:):)

बहुत कोमल सी अभिव्यक्ति

shikha varshney ने कहा…

hmm सब रिश्वत खोर हो गए हैं आजकल :)
बहुत प्यारी सी रचना.

सुशील बाकलीवाल ने कहा…

शब्द भी अपने न रहे...

Rajiv ने कहा…

वंदना जी,नमस्कार.
शब्द भी सामाजिक परिवेश से प्रभावित हुए लगते है."बेईमान " और "रिश्वत" शब्द के प्रयोग ने अर्थ को अत्यंत प्रभावशाली बना दिया है.वैसे भी आपकी रचनाएँ मन को छू जाती है.सुंदर.

kshama ने कहा…

Bahut pyaree,bholee-si rachana!

इमरान अंसारी ने कहा…

वाह......शब्दों की जादूगरी है......मोहने की कला.....बहुत खूब |

सदा ने कहा…

ये शब्द बहुत
बेईमान हो गये है
आजकल
जब भी देखते हैं तुम्हे
मेरा दामन छोड
तुम्हारे पहलू मे
सिमट आते हैं"
वाह ... नि:शब्‍द करती यह पंक्तियां ..।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत शानदार और जानदार रचना लिखी है आपने!

वर्ज्य नारी स्वर ने कहा…

सुंदर भाव लिए हुए सशक्त प्रस्तुति

राज भाटिय़ा ने कहा…

बहुत सुंदर रचना, धन्यवाद

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

kaun hai vo??????

जाट देवता ने कहा…

जाट देवता की राम-राम,
लोग भी बेइमान हो गये है अब तो।

udaya veer singh ने कहा…

bhavnaon ka pravah gatishilata ko nirantar gati pradan karta hua. bahut sundar rachana ji. badhayi.

वाणी गीत ने कहा…

मेरा दामन छोड़ कर तुम्हारे पहलू में आ गए ...
ये बेईमान शब्द कौन सा नया फ़साना गढ़ने वाले हैं ...
कितनी प्यारी शिकायत है और संदेसा किसी नयी रचना का ..
रोचक ...!

अरूण साथी ने कहा…

यही तो राज है...आभार..

Kunwar Kusumesh ने कहा…

शब्दों में जान फूंक दी आपने , वाह.

रूप ने कहा…

shabdon ke sarokar prabhawi hain , aur rishwat to aapko mil hi gayee !

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

बहुत ही कोमल भावनाओं में रची-बसी खूबसूरत रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

'बताओ न

कौन सी

रिश्वत देते हो '

************

भाव और शब्द शिल्प अद्भुत....विह्वल प्रस्तुति

रजनीश तिवारी ने कहा…

बहुत अच्छा अंदाज़ । बहुत सुंदर रचना ।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

सदियों पुराना प्रश्न।

***Punam*** ने कहा…

सारी जादूगरी शब्दों की है...
कोई उन्हीं को अपनी पतवार बनाता है तो कोई ढाल
कोई उन्हीं से तीर चलाता है तो कोई तलवार ...
निर्भर करता है शब्दों का इस्तेमाल करने वाले पर कि उन्हें कब कहाँ और कैसे उपयोग में लाये ....
खूबसूरत..!!

अमित श्रीवास्तव ने कहा…

one word......excellent.

Vijay Kumar Sappatti ने कहा…

vandana ji ,
ye ek naya pryaas hai aapka , jo ki ek dialogue format me hote hue bhi nahi hai .. aur kavita me chupi hui hai man ki baat ko ujagar karte hai . aapke is naye prayaas ke liye aapko bahut bahdyi ..

badhayi

मेरी नयी कविता " परायो के घर " पर आप का स्वागत है .
http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/04/blog-post_24.html

Amrita Tanmay ने कहा…

बढ़िया कविता